गाय के गोबर का बढ़ता कारोबार भारत से करोड़ों का निर्यात

गाय के गोबर की मांग में उछाल, भारत से हो रहा करोड़ों का निर्यात

📌 नई दिल्ली: दुनियाभर में जैविक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ रही है, और इसी के साथ गाय के गोबर का वैश्विक बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। भारत इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और हर साल ₹400 करोड़ से अधिक का गाय का गोबर विभिन्न रूपों में निर्यात कर रहा है।

खेतों में घूमता हुआ गायों का झुंड, प्राकृतिक माहौल में।

🌍 क्यों बढ़ रही है गाय के गोबर की मांग?

1️⃣ जैविक खेती के लिए वरदान

पश्चिम एशियाई देशों में गोबर पाउडर का उपयोग पाम के पेड़ों की खेती में किया जा रहा है। यह उर्वरक मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाता है और फसलों की पैदावार को सुधारता है।

2️⃣ इको-फ्रेंडली ईंधन का विकल्प

गोबर से बनी बायो ब्रिकेट्स (लकड़ी का विकल्प) को पारंपरिक लकड़ी और कोयले के स्थान पर उपयोग किया जा रहा है। इससे वनों की कटाई को रोकने में मदद मिल रही है।

3️⃣ ऑर्गेनिक गार्डनिंग और लैंडस्केपिंग

अमेरिका, सिंगापुर और मालदीव जैसे देशों में गोबर खाद की मांग तेजी से बढ़ी है। यह बागवानी और कृषि के लिए एक प्राकृतिक उर्वरक है।


🚢 किन देशों में सबसे ज्यादा निर्यात हो रहा है?

भारत से सबसे ज्यादा गाय का गोबर निम्नलिखित देशों में निर्यात हो रहा है:

मालदीव – जैविक खेती और गार्डनिंग के लिए
सिंगापुर – वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग के लिए
अमेरिका – ऑर्गेनिक उर्वरक और लैंडस्केपिंग के लिए


💡 किसानों और उद्यमियों के लिए नया व्यापार अवसर

गाय के गोबर की बढ़ती मांग के कारण भारत में कई स्टार्टअप और कृषि कंपनियां इस उद्योग में निवेश कर रही हैं।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा: गोबर एक प्राकृतिक संसाधन है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का जरिया मिल सकता है।
सरकारी योजनाओं का लाभ: जैविक खेती और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है।


🔚 निष्कर्ष

गाय का गोबर अब सिर्फ पारंपरिक उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण निर्यात उत्पाद बन चुका है। जैविक खेती, ग्रीन एनर्जी और ऑर्गेनिक गार्डनिंग की बढ़ती मांग के कारण भारत इस क्षेत्र में एक नए वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।

➡ क्या भारत इस उभरते उद्योग में विश्व लीडर बन सकता है? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं!

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